तीन पत्ते, और उनमें से जिसका हाथ सबसे दमदार — पॉट उसी का। नियम इतने ही सीधे हैं, पर जीत-हार अक्सर बारीक़ बातों पर टिकती है: कब ब्लाइंड रहें और कब पत्ते देखें, शो किस मौके पर माँगें, और आपके हाथ में जो है वो असल में कितना दम रखता है। हमने नीचे हर बात उसी तरतीब में रखी है जैसे वो टेबल पर आपके सामने आएगी।
एक राउंड की शुरुआत से आख़िर तक
- बूटपत्ते बँटने से पहले हर खिलाड़ी एक तय रकम — बूट — पॉट में रखता है। यहीं से राउंड का पैसा जमा होना शुरू होता है।
- तीन पत्तेसबके सामने तीन पत्ते उल्टे रख दिए जाते हैं। चाहें तो इन्हें छुए बिना भी पूरा राउंड खेला जा सकता है।
- आपकी बारीहर बार तीन में से एक चुनिए — चाल यानी दांव आगे बढ़ाना, पैक यानी हाथ छोड़ देना, और जब मेज़ पर सिर्फ़ दो लोग रह जाएँ तब शो।
- फ़ैसलाबाकी सब पैक कर दें या फिर शो में पत्ते खुल जाएँ — जो भी हो, सबसे बड़ा हाथ पूरा पॉट समेट लेता है।
ब्लाइंड बनाम सीन: जेब पर क्या फ़र्क़
शुरुआत सब ब्लाइंड से ही करते हैं। जब तक पत्ते बंद पड़े हैं, आपकी हर चाल मौजूदा स्टेक जितनी ही होती है। जैसे ही आपने पत्ते देख लिए, आप सीन खिलाड़ी कहलाते हैं — और अब वही चाल आपको दोगुनी पड़ेगी।
मान लीजिए बूट ₹10 का है और राउंड में आप पाँच चालें चलते हैं। ब्लाइंड रहते हुए यह ₹50 में निपटेगा, जबकि पत्ते देख लेने के बाद यही पाँच चालें ₹100 ले लेंगी। सस्ता तो ब्लाइंड है, पर कीमत यह है कि आप तब तक नहीं जानते कि हाथ में ट्रेल बैठा है या बस अकेला 7 का हाई कार्ड।
कौन सा हाथ कितना बड़ा, और कितनी बार बनता है
52 पत्तों में से तीन उठाने के कुल 22,100 तरीके होते हैं। नीचे की टेबल में देखिए कि हर किस्म का हाथ इनमें से कितनी दफ़ा बनता है — और सबसे ऊपर वाला सबसे ताक़तवर है।
| हाथ | मतलब | संभावना | मोटे तौर पर |
|---|---|---|---|
| ट्रेल (Trail) | एक ही नंबर के तीन पत्ते, जैसे 9-9-9 | 0.24% | 425 में 1 बार |
| प्योर सीक्वेंस | एक ही रंग के लगातार तीन पत्ते, जैसे 5♥ 6♥ 7♥ | 0.22% | 460 में 1 बार |
| सीक्वेंस | लगातार तीन पत्ते, रंग अलग-अलग | 3.26% | 31 में 1 बार |
| कलर | एक ही रंग के तीन पत्ते, लगातार नहीं | 4.96% | 20 में 1 बार |
| पेयर | एक जैसे नंबर के दो पत्ते | 16.94% | 6 में 1 बार |
| हाई कार्ड | इनमें से कुछ नहीं; सबसे बड़ा पत्ता गिना जाता है | 74.39% | 4 में 3 बार |
इस टेबल से एक बात पक्की हो जाती है — हर चार में से तीन हाथ सिर्फ़ हाई कार्ड के होते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि ज़्यादातर पॉट किसी बहुत बड़े हाथ से नहीं, बल्कि मामूली हाथ से ही जीते जाते हैं। इसीलिए छोटे-से-छोटे पेयर को भी हल्के में मत लीजिए: वह भी हर हाई कार्ड हाथ पर भारी पड़ता है, यानी चार में से तीन हाथों पर।

सीक्वेंस का क्रम और बराबरी का फ़ैसला
ज़्यादातर भारतीय टेबल पर सबसे ऊँचा सीक्वेंस A-K-Q होता है, उसके ठीक बाद A-2-3। फिर K-Q-J, Q-J-10 और इसी तरह घटते-घटते 4-3-2 तक। ध्यान रहे, पत्ते घूमकर आपस में नहीं जुड़ते, इसलिए K-A-2 को सीक्वेंस नहीं माना जाता।
जब एक ही किस्म के दो हाथ भिड़ें, तो पहले दोनों का सबसे बड़ा पत्ता देखा जाता है, फिर अगला। तभी 8 का पेयर 5 के पेयर को हरा देता है; और पेयर भी बराबर हो तो तीसरा पत्ता फ़ैसला सुनाता है। और अगर शो में दोनों हाथ बिलकुल एक जैसे निकल आएँ, तो दस्तूर के मुताबिक़ शो माँगने वाला हार मान लेता है।
शो और साइड शो का फ़र्क़
शो की नौबत तभी आती है जब मेज़ पर बस दो खिलाड़ी बचें। इनमें से कोई भी शो की रकम चुकाकर दोनों के पत्ते खुलवा सकता है, और जिसका हाथ बड़ा निकले, पॉट उसका।
साइड शो इससे पहले का दाँव-पेंच है और सिर्फ़ सीन खिलाड़ियों के बीच चलता है। अपनी बारी पर आप अपने से ठीक पहले खेलने वाले सीन खिलाड़ी को चुपके से पत्ते मिलाने की पेशकश कर सकते हैं। वह राज़ी हुआ तो जिसका हाथ कमज़ोर होगा उसे पैक करना पड़ेगा; और अगर उसने मना कर दिया, तो खेल बिना किसी बदलाव के आगे बढ़ जाता है।
किसी भी हाथ के 1 से 5 विरोधियों के सामने जीतने के मौके हमारे Teen Patti odds पेज पर दिए हैं (अंग्रेज़ी में) — वहाँ एक चेकर भी है जो बता देता है कि आपके तीन पत्तों में कितना दम है।
असली पैसे की टेबल पर बैठने से पहले
सबसे पहले रैंकिंग ज़बानी याद कर लें — नए खिलाड़ी सबसे ज़्यादा पैसा यहीं गँवाते हैं, कलर को सीक्वेंस से ऊपर समझ बैठने पर। कमज़ोर पत्ते मिलें तो वक़्त रहते पैक कर देना हार नहीं, अक़्लमंदी है। और टेबल पर बैठने से पहले एक रकम तय कर लें — वह ख़त्म हुई तो उसी घड़ी उठ जाएँ।
सिर्फ़ 18+ · असली पैसा · हर नतीजा रैंडम है, जीत की कोई गारंटी नहीं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कलर और सीक्वेंस में बड़ा कौन?
सीक्वेंस कलर से ऊपर आता है। मज़बूती का पूरा क्रम याद रखें — ट्रेल सबसे ऊपर, फिर प्योर सीक्वेंस, सीक्वेंस, कलर, पेयर, और सबसे नीचे हाई कार्ड।
A-K-Q बड़ा है या A-2-3?
देश की ज़्यादातर टेबल A-K-Q को नंबर एक मानती हैं और A-2-3 को उसके ठीक नीचे। लेकिन कुछ जगह A-2-3 को सबसे ऊपर रखा जाता है, इसलिए खेलने से पहले टेबल की info स्क्रीन एक बार ज़रूर पढ़ लें।
ब्लाइंड बेहतर है या सीन?
ब्लाइंड में दांव आधा पड़ता है, पर फ़ैसला अंधेरे में करना होता है। शुरुआत कर रहे हैं तो सीन खेलना आसान रहता है, क्योंकि तब आपको अपने पत्ते दिख रहे होते हैं।
शो में दोनों हाथ बराबर हो जाएँ तो?
ऐसी हालत में आम दस्तूर यही है कि जिसने शो माँगा था वही हारता है। याद रहे, हर टेबल के अपने हाउस रूल हो सकते हैं।
